साभार फेसबुक
नायक शिशपाल सिंह का जन्म 26 जून 1920 को ब्रिटिश भारत के संयुक्त पंजाब (वर्तमान हरियाणा के भिवानी जिला) के बामला गाँव में श्री श्योलाल सिंह ग्रेवाल के घर में हुआ था। शिशपाल सिंह की कुश्ती में रूचि थी और वह अपनी तहसील में प्रसिद्ध पहलवान थे। उनके गाँव में या निकट कोई विद्यालय नहीं था, इसलिए वे औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके थे। वर्ष 1940 में 20 वर्ष की आयु में वह ब्रिटिश-भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 2 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
नायक शिशपाल सिंह ने सेना में भर्ती होने के पश्चात भी कुश्ती की अनेक प्रतियोगिताओं में अपनी बटालियन के लिए अनेक पुरस्कार प्राप्त किए थे। नायक शिशपाल सिंह 2 जाट की ‘B’ कंपनी की 4th प्लाटून में थे। 1947-48 के कश्मीर युद्ध में 2 जाट बटालियन को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया था।
9 अप्रैल 1948 की रात में उन्हें पॉइंट 3831 नाम के एक सामरिक महत्व के स्थान पर अधिकार के लिए आक्रमण की अगुवाई करने का आदेश प्राप्त हुआ। आक्रमण के प्रारंभ में उनकी जांघ पर गोलियां लग गईं किंतु, वह मोर्चे से नहीं हटे और घाव पर पट्टी बांध कर अपने सैनिकों का नेतृत्व करते रहे।
उसी समय, उन्होंने देखा की शत्रु की मशीनगन एक ओर से भयानक फायरिंग कर रही थी और उनकी प्लाटून के सैनिकों को क्षति पहुंचा रही थी, शत्रु की भीषण गोलीबारी में, झाड़-झंखाड़ो के बीच रेंगते हुए शिशपाल सिंह आगे बढ़े, और शत्रु की मशीनगन की अंगारे जैसी लाल बैरल को पकड़कर उसे बाहर खींच लिया और उस बंकर में एक हथगोला फेंक दिया, जिसके भीषण विस्फोट से मशीनगन चालक दल मारा गया। इसके पश्चात वह रेंगते हुए पीछे लौटे और अपनी आगे बढ़ती हुई प्लाटून के साथ जुड़ गए।
जब यह प्लाटून आक्रमण करने की दूरी पर पहुंची, तो उन्होंने सिंहनाद किया “जाट बलवान” अन्य जवान बोले “जय भगवान” और यह प्लाटून संगीनों से शत्रु के बंकरों पर टूट पड़ी। नायक शिशपाल सिंह को संगीन से तीन शत्रु सैनिकों को मारते हुए देखा गया किंतु उनके पेट में भी शत्रु की संगीन का घातक वार लगा और वह गिर गए।
यह 10 अप्रैल 1948 की प्रातः सूरज निकलने से आधा घंटा पूर्व की घटना थी। प्लाटून ने उन्हें गिरते देखा, और उनका अंतिम आदेश सुना “र जाटों, चड जाओ पोस्ट प, फहरा दो तिरंगा, मेरे मरन त पहला…”। उनके इन शब्दों से प्रेरित प्लाटून ने वीरता से युद्ध किया और पॉइंट 3831 पर अधिकार कर लिया। नायक शिशपाल सिंह के प्राण इसी में अटके थे। पोस्ट पर तिरंगा फहराने के पश्चात ही वह वीरगति को प्राप्त हुए।
यह पॉइंट अब नौशेरा से 9 किमी उत्तर-पश्चिम में नियंत्रण रेखा पर एक भारतीय पोस्ट है, जिसका नाम ‘रोहतक पोस्ट’ है।
नायक शिशपाल सिंह ग्रेवाल को उनके असाधारण साहस, प्रचंड वीरता, युद्ध की अडिग भावना एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। गुरुग्राम में एक हाउसिंग सोसाइटी का नाम उनके सम्मान में “शिशपाल विहार” किया गया है।
नायक शिशपाल सिंह ग्रेवाल के बलिदान को भारत में युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा।




