देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पंडित दीनदयाल पार्क में स्वच्छता सप्ताह के तहत पार्क में झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए 10 पर्यावरण मित्रों को सम्मानित भी किया। वहीं आमजन को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रदेश की 102 निकायों में स्वच्छता का महा आभियान चल रहा है। देश – विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक उत्तराखंड आते हैं। राज्य का प्रत्येक जिला और पर्यटन स्थल को स्वच्छ व सुंदर रखने की जिम्मेदारी यहां के प्रत्येक व्यक्ति की है।
सीएम धामी ने कहा कि देहरादून को “स्वच्छ दून, सुंदर दून” बनाने के लिए जन भागीदारी से विभिन्न स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में स्वच्छ भारत अभियान ने एक बड़े जनांदोलन का रूप लिया, जिसका परिणाम अब दिखने लगा लगा है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक विनोद चमोली, सविता कपूर, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु आदि मौजूद थे।
कोटद्वार। भारत सरकार के आदेशों के क्रम में 26 जून को मादक पदार्थों के दुरुपयोग व अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 12 से 26 जून तक नशा मुक्त भारत पखवाड़ा के क्रम में आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता चौबे के निर्देशन व अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार शेखर चन्द सुयाल, पुलिस उपाधीक्षक ऑपरेशन विभव सैनी के पर्यवेक्षण में सीआईयू टीम द्वारा सार्वजनिक स्थलों टैक्सी स्टैंड पर नशे से होने वाले दुष्परिणाम के संबंध में जागरूक अभियान चलाया गया और जनता को मौखिक रूप से इसके दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।
उत्तरकाशी: चिन्यालीसौड़ विकासखंड कोटीसौड़ भड़कोट में आज सुबह गुलदार के हमले से एक महिला की मौत की सूचना मिली है। गुलदार के हमले से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना है।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार चिन्यालीसौड़ के ग्राम भड़कोट में आज सुबह 9 बजे घर के नजदीक ही घास लेने गई भागीरथी देवी पत्नी स्वo भूपति प्रसाद नौटियाल को गुलदार ने अपना शिकार बनाया। ग्रामीण महिला को अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया है।
ग्राम प्रधान शिवराज बिष्ट ने इस घटना की जानकारी की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि गुलदार ने महिला को घसीटकर झाड़ियों में ले गया। जहां से महिला के शव को रेस्क्यू करने में बड़ी दिक्कतें आई।
इस घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस और वन विभाग को दी। ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। मृतक महिला का नाम भागीरथी देवी उम्र 40 वर्ष बताई जा रही है।
देहरादून: 1425 अभ्यर्थियो को आज उत्तराखंड पुलिस में नियुक्ति दी गई है। पुलिस लाइन देहरादून में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 55 अभ्यर्थियो को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। आरक्षी जनपद पुलिस,आरक्षी पीएसी/ आई.आर0.बी. तथा फायरमैन में चयनित कुल सभी 1425 अभ्यर्थियो को आज नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये। मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस आरक्षी के जो 1550 शेष रिक्त पद है, उन पर नई भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जायेगी।
पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नवनियुक्त आरक्षियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया इसके साथ ही 13 जिलों में पुलिस के बड़े अधिकारियों ने आरक्षियों को नियुक्ति पत्र दिया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पुलिस महकमे में अभी भी 4000 पद खाली हैं जो जल्द ही भरे जाएंगे इसके साथ ही इस वर्ष 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का भी लक्ष्य रखा गया है। जो कि तामाम विभागों में शुरू भी किया जा चुका है। इसके साथ ही जगह – जगह रोजगार मेले भी लगाए जाएंगे प्राइवेट और सरकारी विभागों में भी युवाओ को नोकरियों का अवसर मिलेगा। आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी अशोक कुमार, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी सहित तमाम पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।
कोटद्वार: पूरे उत्तराखंड प्रदेश में पुलिस की ओर से सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जनपद पौड़ी गढ़वाल में एसएसपी श्वेता चौबे के दिशा निर्देशन में कोटद्वार कोतवाली पुलिस ने अलग अलग स्थानों पर लोगों के चालान काट कर उनसे लगभग 7लाख की वसूली की है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मणि भूषण श्रीवास्तव ने बताया कि यह कार्यवाही पुलिस की ओर से लकड़ी पड़ाव, आम पड़ाव, कोड़िया, झूला बस्ती समेत कई मोहल्लों में चलाया गया है। इस दौरान 69 मकान मालिकों के किरायदारों का सत्यापन न किए जाने पर चालान काटे है। इस दौरान 69 मकान मालिकों के किरायदारों का सत्यापन न किए जाने पर चालान काटे हैं। इस दौरान 56 चालान 81पुलिस एक्ट के किए गए हैं। इन चालानों से 14 हजार रुपए की धनराशि वसूली गई है।
कोटद्वार। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी श्रीमती श्वेता चौबे के निर्देशन में जनपद के थाना लक्ष्मणझूला क्षेत्र के अन्तर्गत आगामी G20 कार्यक्रम के दृष्टिगत थाना लक्ष्मणझूला परिसर की दीवारों पर उत्तराखण्ड की “ऐपण” चित्रकला का प्रयोग करते हुए साइबर फ्रॉड, महिला सम्बन्धी अपराध, उत्तराखण्ड पुलिस एप के गौरा शक्ति मोड्यूल एवं यातायात नियमों की जानकारी देकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया है, जिससे उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति कला “ऐपण” का देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में काफी प्रचार-प्रसार होगा।
वर्तमान में लक्ष्मण झूला क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं द्वारा पहाड़ी धरोहर ऐपण चित्रकला की काफी सराहना की जा रही है। किसी त्यौहार और शुभ कार्यो के अवसर पर चावल, गेरु, हल्दी, जौ और रोली से भूमि और दीवारों पर बनायी जाने वाली चित्रकला “ऐपण” कहलाती है। यह उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति व लोक परम्परा है| “ऐपण” चित्रकला को आध्यात्मिक एवं सकारात्मक उर्जा का प्रतीक माना जाता है।
रुड़की: भगवानपुर के मानक मजरा गांव में गुलदार ने तीन युवकों पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है की दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं एक युवक को हल्की चोट आई है। मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार देर रात को नवाब व मोनिश और साजेब आम के बाग की रखवाली कर रहे थे। इसी बीच गुलदार ने युवाओं पर पंजों और दांतो से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। इस हमले में मोनिश और नवाब गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके साथ ही साजेब को कम चोटें आईं हैं।
रिखणीखाल प्रखंड के ग्राम जुई,पापड़ी व बनवसा रिसोर्ट के आसपास बाघ का आतंक फैला हुआ है।लोग दिन में भी घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।भरी दुपहरी में भी ये पांच बाघ एक साथ विचरण करते देखे गये हैं।लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है।स्कूली बच्चे ,नौकरी पेशा आदि वाले दहशत के मारे घरों में दुबके हैं।
ग्राम जुई,पापड़ी व वहां स्थित बनवसा रिसोर्ट कालागढ टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के लैसडौन वन प्रभाग के अन्तर्गत आता है।ये इलाका चारों तरफ से घनघोर जंगलों से घिरा हुआ है।ग्रामीण वन विभाग को भी सूचित कर चुके हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है।यहाँ इस सीजन में पर्यटक भी घूमने आने लगे हैं,उनके साथ भी कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है।फिलहाल दहशत के भय से पर्यटक सीमित संख्या में आ रहे हैं।लोगों का दिन रात जीना हराम हो गया है।
वन विभाग कब तक सुध लेता है ये कुछ कहा नहीं जा सकता।
राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू अपने शांत वातावरण और हरे-भरे माहौल की वजह से इस राज्य का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरी भरी पहाड़ियों, निर्मल झीलों, सुंदर मंदिरों और अनेक धार्मिक स्थानों के लिए प्रसिद्द है।
माउंट आबू एक ऊँचे अरावली पर्वत की आच्छादित श्रृंखलाओं घिरा हुआ है।इसे आबू पर्वत के नाम से भी जानते हैं।इसकी ऊँचाई समुद्र तल से 6000 फीट है।माउंट आबू पहुँचने के लिए नजदीकी रेलवे-स्टेशन अबू रोड़ है।अबू रोड़ माउंट आबू की तलहटी में स्थित है।ये तो राजस्थान के अन्य स्टेशन की ही तरह है।माउंट आबू एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है जैसे लैंसडौन मसूरी आदि,लेकिन उनसे भिन्न है।उत्तराखंड से माउंट आबू की दूरी 1100 से 1300 किलोमीटर है।यहाँ पहुँचने के लिए अबू रोड़ रेलवे-स्टेशन से बस टैक्सी बराबर मिलती हैं जिसकी दूरी 28 किलोमीटर पड़ती है।यहाँ का मौसम पल पल बदली होता रहता है।दिन में कई बार वातावरण बदल जाता है। यहाँ पत्थरों की बड़ी बड़ी शिलाएं हैं।पत्थर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि कितना बड़ा व कहाँ तक फैला है।प्रत्येक पत्थर पर एक विशेष आकृति खुदी हुई है,जो गोलनुमा आकार में है।यहाँ के स्थानीय लोगों को पूछने पर वे भी न बता सके कि ये आकृति कैसी बनी है।यहाँ पर जो भी आवासीय भवन हैं वे सब टिन शैड के बने हैं।
यहाँ एक छावनी क्षेत्र भी है।यह स्थान पर्यटकों के घूमने फिरने व मनोरंजन के लिए सुविधाजनक स्थान है।यहाँ का मौसम सर्दियों के लिए थोड़ा कष्टकारी है,शेष दिनों के लिए एक समान वातावरण है।बारिश,धूप ,कोहरा सब समान रूप से है।विशेषतः गर्मियों के लिए सगून भरा वातावरण रहता है।
यहाँ पर भारतीय सेना की एक टुकड़ी भी स्थित है जो कि विशिष्ट मेहमानों व सैन्य बल के लिए आवाभगत में व्यस्त रहती है।वर्तमान में यहाँ पर उच्चकोटि की व कयी गैलेन्टरी अवार्ड,सैन्य प्रशस्ति पत्र से सम्मानित बटालियन गढ़वाल राइफल्स की 19 वाहिनी की टुकड़ी मौजूद है।इस यूनिट का अब यहाँ तैनाती का आखिरी वर्ष है।
माउंट आबू पूर्ण रूप से पहाड़ी क्षेत्र है।चारों तरफ बड़े बड़े विशालकाय पत्थर,गुफाएं,छोटी प्रजाति के पेड़ पौधे हैं।पेड़ पौधों में खासकर खजूर आदि हैं।यहाँ मंदिरों की भरमार है।इस स्टेशन में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस की अकादमी भी है।जहाँ से ट्रेनी पुलिस अधिकारी तैयार होते हैं।यह एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्टेशन है।पक्के भवन बनाने की अनुमति नहीं है।ये हिल स्टेशन मंदिरों,आलीशान होटलों,विशालकाय झील व विशेष प्रकार के आकृति वाले पत्थरों के लिए प्रसिद्ध है।जो पर्यटकों व सैलानियों का मन मोह लेता है।यहाँ पर बहुत लम्बी चौडी झील है। जिसे नक्की झील के नाम से विख्यात है।इस झील की गहराई 65- 70 फीट की गहराई है।यह झील दो भागों में विभाजित है।एक हिस्सा सिविलियन नागरिकों के लिए तथा दूसरा भाग सैन्य बल,अर्द्धसैनिक बल,उनसे सम्बन्धित परिवारों के लिए आरक्षित है।इन सुरक्षा बलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।इसका संचालन सी आर पी एफ करती है।उसके तैराकी कमांडो बोट को चलाते हैं।लाइफ जैकेट पहननी अनिवार्य है।यहाँ निजी स्कूल के अलावा केन्द्रीय विद्यालय भी है।जो भी सेना की एक बटालियन यहाँ पर रहती है उसके परिवार जनों को सरकारी आवास ,कैन्टीन,अस्पताल,मनोरंजन ,फल सब्जी आदि की समुचित व्यवस्था है।बाहर से आने वाले सैन्य बलों व उनके परिवारजनों के लिए रहने,ठहरने,भोजन आदि की चाक चौबंद व्यवस्था रहती है।बाजार भी नजदीक ही है।सिविल आबादी भी खूब है।
यहाँ अधिकतर गुजराती समुदाय के पर्यटक आते हैं,क्योंकि यह राजस्थान का आखिरी स्टेशन है।यह जिला सिरोही,राजस्थान में पड्ता है।इसी स्टेशन से गुजरात राज्य की सीमा आरम्भ हो जाती है। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद की दूरी मात्र 180 किलोमीटर है।यहाँ विदेशी पर्यटक भी देखे जा सकते हैं।
माउंट आबू का सबसे उच्च स्थान गुरुशिखा है।वहाँ पर एक भव्य व मनमोहक मंदिर है।नक्की झील के सड़क के ऊपर मेंढकनुमा TOD ROCK एक विशालकाय पत्थर की अनोखी आकृति है।जिसे लोग देखने जाते हैं।यह झील के पास सड़क से 400 मीटर की दूरी पर है।हफ्ते के शनिवार रविवार को इस हिल स्टेशन में भीड़तंत्र इतना बढ जाता है कि पाँव रखने की जगह नहीं होती।पास ही दिलवाडा एक जगह है वहाँ भी मंदिर है।मंदिरों की इतनी संख्या है कि गिनती असम्भव है।
यहाँ जंगली भालू कभी भी देखे जा सकते हैं लेकिन ये किसी को भी जनहानि नहीं पहुंचाते हैं।दिन में भी सडकों पत्थरों ,आवासीय घरों में विवरण करते देखे जा सकते हैं।भालू सेना के लंगर ,आवासीय परिसर में जूठा भोजन व पानी पीने आते हैं।लेकिन नुकसान की कोई खबर नहीं होती।
इस अरावली पहाड़ी पर कोई भी जल स्रोत नहीं है।नहाने,कपड़े धोने,बगीचे की सिचाई के लिए झील का पानी ही पम्पिग से प्रयोग होता है।सेना के लिए पेयजल के लिए वाटर प्लान्ट लगा है।ये यूनिट यहाँ पर स्वतंत्र है जो अपनी दैनिक दिनचर्या व सैन्य पर्यटकों के आवभगत में व्यस्त है।
लेखक को अपनी यूनिट में आने पर बड़ी प्रसन्नता हुई वे भी इसी बटालियन से सेवानिवृत्त हुए हैं।भले ही उस दौर के लोग नहीं मिले लेकिन जिस यूनिट में शुरुआती दिन बिताये याद आ ही जाती है।