पौड़ी: रिखणीखाल वन क्षेत्र के अदनाला रेंज के जंगलों में घास लेने गई एक बुजुर्ग महिला पर बाघ द्वारा घात लगाकर शिकार किया गया। वहीं परिजनों और ग्रामीणों को महिला का अधखाया शव बरामद हुआ। जिसे वन विभाग द्वारा कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया है । इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहोल व्याप्त हो गया है जबकि इस घटना से ग्रामीणों में नाराजगी है।
रिखणीखाल ब्लॉक के ग्राम झर्त की 76 वर्षीया महिला विशाम्बरी देवी पत्नी स्व कन्हैया लाला साम करीब 5 बजे घर के नजदीक के जंगल में घास लेने गई थी जहाँ बाघ द्वारा झाड़ियों में घात लगाकार महिला पर हमला कर मार डाला गया ।
जब महिला काफी देर तक घर नहीं पहुंची तो परिजनों और ग्रामीणों द्वारा खोजबीन की गई तो महिला का अधखाया शव करीब जब महिला काफी देर तक घर नहीं पहुंची तो परिजनों और ग्रामीणों द्वारा खोजबीन की गई तो महिला का अधखाया शव करीब 6.45 में झाड़ियों में मिला जिसकी सूचना वन क्षेत्राधिकारी अदनाला रेंज को दी गई । जिस पर वन विभाग द्वारा मौके पर पहुँच कर शव कब्जे में ले लिया गया और उसे पोस्ट मार्टम हेतु भेज दिया गया।
गाजियाबाद: शालीमार गार्डन लोहिया पार्क के किनारे पड़े कूड़े से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उत्तरांचल उदय समाचार पोर्टल ने 17 जुलाई को समाचार प्रकाशित किया था ख़बर छपने के बाद विभाग की नींद जागी आज इस कूड़े के ढेर को साफ कर दिया गया है।
देहरादूनः राजधानी देहरादून में भू माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि भू-माफिया फर्जी इनकम टैक्स ऑफिसर बनकर सरकारी दफ्तरों से भी जमीनों के कागज उड़ाने लगे हैं. देहरादून के विकासनगर तहसील से कुछ इसी तरह का मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई की सुबह उत्तर प्रदेश के फरार चल रहे खनन माफिया हाजी इकबाल अहमद की विकासनगर के शाहपुर कल्याणपुर में स्थित संपत्तियों की जानकारी के संबंध में राजस्व उप निरीक्षक को फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम कमल सिंह पद इनकम टैक्स कमिश्रर बताया। फोन करने वाले ने कहा कि उनकी टीम संपत्तियों को सील करने मौके पर आ रही है। राजस्व उप निरीक्षक ने फोन के संबंध में उच्चाधिकारियों को सूचित किया।
फर्जी अधिकारी को भेजकर हासिल किए कागजातः इसके बाद फोन करने वाले ने गुलशन कुमार नाम के व्यक्ति को आयकर अधिकारी बताते तहसील भेजा और संपत्तियों की खतौनी व अन्य कागजात की हार्ड कॉपी भी हासिल कर ली. उधर, राजस्व विभाग की एक टीम आयकर विभाग की टीम के इंतजार में दिनभर संपत्तियों के आसपास भटकती रही। लेकिन, कई दिनों तक कोई टीम नहीं आई तो राजस्व विभाग के अधिकारियों को शक हुआ।
यूपी के मोस्ट वांटेड अपराधी हाजी इकबाल की उत्तराखंड में 300 करोड़ की संपत्ति: राजस्व विभाग ने 18 जुलाई को आयकर विभाग में फोन करके कमल सिंह और गुलशन कुमार के बारे में पूछा तो पता चला कि इस नाम के व्यक्ति विभाग में कार्यरत ही नहीं है। बता दें कि हाजी इकबाल यूपी का मोस्ट वांटेड अपराधी है और उत्तराखंड में उसकी करीब 300 करोड़ रुपए की संपत्ति है। कुछ लोगों ने खुद को आयकर अधिकारी बताकर राजस्व विभाग से उत्तर प्रदेश के खनन माफिया हाजी इकबाल की संपत्तियों के कागजात हासिल कर लिए। तहसील प्रशासन के साथ हुई इस धोखाधड़ी से खलबली मची है। आयकर विभाग द्वारा ऐसी कार्रवाई से इनकार करने के बाद विकासनगर कोतवाली में धोखाधड़ी और सरकारी काम में बाधा डालने आदि की धाराओं में मुकदमा किया गया है।
हाजी इकबाल पूर्व में एमएलसी रह चुका है और पिछले 2 साल से फरार चल रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दो लाख रुपए का ईनाम भी घोषित किया है। सीओ विकास नगर भास्कर लाल ने बताया कि राजस्व उप निरीक्षक डिंपल ने शहर कोतवाली में तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गाजियाबाद जब से कमिश्रेरट बनी है, अपराध की दुनिया में महानगर का नाम सुर्खियों में
गाजियाबाद।साहिबाबाद थाने अर्न्तगत अर्थला कॉलोनी में आज सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब सोमवती अपने घर के पास कूड़ा डालने के लिए निकली। दो नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें अपना निशाना बनाते हुए उनके कान काटकर सोने के कुंडल लूट लिए और फरार हो गए। वारदात के बाद दोनों बदमाश पैदल आए हुए थे।
वारदात से पूरे क्षेत्र में भय का महौल बना हुआ। मौके पर पहुंच कर साहिबाबाद पुलिस ने घटना की जानकारी ली और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगलाना शुरु किया। सोमवती ने बताया कि सुबह लगभग साढ़े पांच बजे मैं अपने घर से कूड़ा डालने जा रही थी, कि दो लोग नकाबपोश पीछा करते आए और पास आकर कहा राम-राम, और मेरा कान काटा और सोने के कुंडल छीन कर ले गए। शोर मचाने के बाद दोनों बदमाश भागने में सफल हो गए। आरोप है कि सुबह से पुलिस के अधिकारी एफआईआर दर्ज करने के लिए इधर से उधर घुमाते रहे। थानाध्यक्ष साहिबाबाद का कहना है पुलिस इस की मामले की जांच कर रही है। एफआईआर दर्ज कराने में लगे कई घंटे ।
बदमाशों ने बदला लूट का समय व तरीका पहले बदमाश रातों में लूट करने की योजना बनाते थे लेकिन अब बदमाशों ने रात का समय बदलकर सुबह सुबह लूट व वारदात करने का समय बना लिया है। बताते दें ये समय पुलिस मैन्युअल में नींद का है। इसका फायदा उठाकर बदमाश अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते हैं।
जिले में ऐसी वारदात हो गई है आम गाजियाबाद जब से कमिश्रेरट बनी है। अपराध की दुनिया में महानगर का नाम तेजी से उपर आ रहा है। बदमाश रोजाना पुलिस की नाक के नीचे वारदात कर रहे हैं और पुलिस कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पा रही है। आरोप है कि पुलिस चैकिंग के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ती करती नजर आ रही है। पहले भी इस तरह की वारदातें हो चुकी हैं लेकिन पुलिस के हाथ खाली के खाली हैं।
मणिपुर की हैवानियत पर आज पूरा देश शर्मसार है। पिछले लंबे समय से जातीय हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर में महिलाओं के साथ जिस तरह से दरिंदगी की तरह व्यवहार किया गया उससे हर किसी का सिर शर्म से झुक गया है।
हर कोई लज्जित महसूस कर रहा है । भले ही महिलाओं के साथ हैवानियत की यह घटना पूर्वोत्तर के एक राज्य में घटी हो लेकिन इस गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली इस घटना की गूंज लोकतंत्र के मंदिर संसद से लेकर सड़क तक सुनाई दे रही है।
PM @narendramodi जी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रीयों से अपील की – महिला सुरक्षा, सम्मान एवं संरक्षण हेतु समर्पित भाव से काम करें।
घटना चाहे राजस्थान, छत्तीसगढ़ अथवा मणिपुर की हो, महिलाओं के खिलाफ़ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। pic.twitter.com/OsKXhXGfvb
पीएम मोदी ने तोड़ी चुप्पी – मणिपुर को लेकर आज आखिरकार पीएम मोदी को अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी। पीएम ने कहा कि मणिपुर की घटना से उनका मन क्रोध से भरा हुआ है। मणिपुर की घटना को सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना बताते हुए कहा कि गुनाह करने वाले कितने और कौन हैं, वो अपनी जगह पर हैं पर बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। मणिपुर की बेटियों के साथ जो हुआ है इसको कभी माफ नहीं किया जाएगा। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन मणिपुर की घटना पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस देश के किसी भी कोने में, किसी के भी राज्य सरकार में राजनीति और वाद-विवाद से ऊपर उठकर कानून व्यवस्था का महात्म्य और नारी का सम्मान है। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा। कानून अपनी पूरी शक्ति से और सख्ती से एक के बाद एक कदम उठाएगा। मणिपुर की इन बेटियों के साथ जो हुआ है इसको कभी माफ नहीं किया जाएगा।
देहरादून। राज्य के चमोली जनपद के पीपलकोटी में बिजली का करंट लगने से एक साथ 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। करंट लगने वालों में प्रभारी थानेदार, तीन होमगार्ड और 12 स्थानीय लोग शामिल हैं। जबकि 6 लोग करंट से घायल हुए हैं। इनमें से 2 का इलाज चमोली जिला अस्पताल तथा 4 को हायर सेंटर देहरादून में इलाज दिया जा रहा है। इस हादसे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख जताते हुए मौके पर रवाना हो गए हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक गत दिवस देर रात चमोली के पीपलकोटी के नमामि गंगे प्रोजेक्ट में करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई थी। आज पंचनामा भरने के लिए पुलिस की टीम सुबह मौके पर पहुंची थी। इस दौरान मृतक के परिजन और स्थानीय व्यापारी भी घटनास्थल पर मौजूद थे। अचानक एक बार फिर करंट फैल गया। मैके पर मौजूद करीब 22 लोग करंट की चपेट में आ गए। जिनमे से 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। जबकि 6 को घायलों को अस्पताल ले जाया गया। इनमें 4 को हेलीकॉप्टर के जरिए हायर सेंटर देहरादून रेफर कर दिया गया है। जबकि 2 घायलों का चमोली अस्पताल में इलाज चल रहा है। पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इधर, घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए स्वयं मौके पर रवाना हो गए हैं।
देहरादून: टोपोग्राफिकल स्टाफ एसोसिएशन देहारादून ब्रांच के 2023-2025 का चुनाव दिनांक 18-07-2023 को शाम 7:00 से 8:00 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया जाना था। इससे पूर्व दिनांक 09-07-2023 को चुनाव की तिथि तय की गई थी लेकिन सभी सदस्यों के मीटिंग मे शामिल न होने के कारण चुनाव सम्पन्न न हो सका। टोपोग्राफिकल स्टाफ एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरि सिंह द्वारा जिसकी सूचना व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भेजी गई है कि निम्नलिखित पदो पर चुनाव किया जाना है :-
President 01
Vice President 02
Secretary 01
Joint Secretary 02
Organising Secretary 01
Finance Secretary 01
AIC/Working Committee Members 04
Auditor 02
आपसे आग्रह किया जाता है कि यदि कोई सदस्य किसी पद के लिए आवेदन करना चाहता है तो whatsapp group के माध्यम से अपना आवेदन दे सकता है।
अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित विभागों को एनजीओ के साथ मिलकर राज्य से जल्द से जल्द बालश्रम, भिक्षावृति तथा बाल विवाह समाप्त करने हेतु सटीक एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं।
एसीएस श्रीमती राधा रतूड़ी ने कहा कि बालश्रम व भिक्षावृति से मुक्त हुए बच्चों का संस्थागत पुनर्वास के स्थान पर अपने परिवारों में ही पुनर्वास को प्राथमिकता,बालश्रम व बाल भिक्षावृति को रोकने के लिए सम्बन्धित विभागों व एनजीओं को स्थायी समाधान (सस्टेनबल सोल्यूशन) पर काम करना होगा। मंगलवार को अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने सचिव समाज कल्याण, सचिव विद्यालयी शिक्षा, सचिव श्रम, पुलिस अधिकारियों सहित राज्य में बाल संरक्षण एवं कल्याण के लिए कार्य कर रहे विभिन्न गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों के साथ राज्य में बालश्रम, भिक्षावृति एवं बाल विवाह को समाप्त करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने के सम्बन्ध में बैठक लेते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश में ऐसे कमजोर परिवारों (वलरेनबल फैमिली) को चिन्हित किया जाना जरूरी हैं जिनकी खराब आर्थिक स्थिति के कारण बच्चें बालश्रम व भिक्षावृति की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे चिन्हित परिवारों को सरकार द्वारा संचालित सभी सामाजिक एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करवाया जाना चाहिए। इसके साथ ही एसीएस ने स्कूलों से ड्रॉप आउट बच्चों, स्कूलों में गैरहाजिर रहने वाले बच्चों, आउट ऑफ स्कूल बच्चों का एक सटीक डाटाबेस भी जल्द ही तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान राज्य में बालश्रम, भिक्षावृति एवं बाल विवाह को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए शासन स्तर पर एक हाई पॉवर कमेटी के गठन पर भी चर्चा की गई। इस कमेटी में बाल संरक्षण के लिए कार्य कर रहे गैर सरकारी संगठनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके साथ ही बैठक में भिक्षावृति में लिप्त आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए स्पेशल स्कूलों व मोबाइल स्कूलों को प्रोत्साहित करने पर भी विचार किया गया।
बैठक में सचिव श्रीमती राधिका झा, डा. रविनाथ रमन, मेजर योगेन्द यादव, विशेष सचिव गृह श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव गृह श्रीमती निवेदिता कुकरेती, अपर सचिव श्रीमती अमनदीप कौर, श्री आनंद स्वरूप, डीआईजी श्रीमती पी रेणुका देवी, बचपन बचाओं आंदोलन से श्री मनीष शर्मा, श्री सुरेश उनियाल तथा विभिन्न एनजीओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
उत्तराखंड:यह राजकीय इंटर कॉलेज सीकूखाल जिला पौड़ी गढ़वाल है I मेरी कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा इसी विद्यालय में हुई है। पूर्व में यह विद्यालय इंटर कॉलेज सीकू khalyunsain के नाम से जाना जाता था । बाद के वर्षों में इसका प्रांतीयकरण हुआ और अब यह विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज सीकूखाल के नाम से जाना जाता है।
मैंने इस विद्यालय में सन 1988 से 1994 तक अध्ययन किया । मेरे पिताजी इस विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे। यह विद्यालय मेरे गांव चुरानी ब्लॉक रिखणीखाल से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित था। जब मैं कक्षा 6 में पढ़ता था तब मेरी बड़ी बुआ जी का बेटा श्री अनूप सिंह बिष्ट इंटर कॉलेज सीकू में मेरे पिताजी के साथ रहकर कक्षा 12 में पढ़ता था । बड़े भाई के कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के पश्चात मेरी छोटी बुआ का बेटा श्री सत्येंद्र सिंह बिष्ट हमारे साथ पढ़ाई करने के लिए आया। इस प्रकार वर्ष 1988 में श्री अनूप सिंह बिष्ट कक्षा 12, श्री धर्मेंद्र सिंह नेगी कक्षा 7 और श्री शैलेंद्र सिंह नेगी कक्षा 6 में पढ़ते थे । वर्ष 1989 में श्री अनूप सिंह बिष्ट के उच्च शिक्षा के लिए जाने के पश्चात श्री धर्मेंद्र सिंह नेगी कक्षा 8, श्री शैलेंद्र सिंह नेगी कक्षा 7 ,श्री सत्येंद्र सिंह बिष्ट कक्षा 7 मेरे पिताजी के साथ रहने लगे। हमारे बीच झगड़ा ना हो, इसके लिए घर का काम बंटा हुआ था। वर्ष 1988 में श्री अनूप सिंह बिष्ट कक्षा 12 को रोटी बनाने तथा 2 डिब्बा पानी लाने की जिम्मेदारी थी। श्री धर्मेंद्र सिंह नेगी कक्षा 7 की जिम्मेदारी बर्तन साफ करने की तथा दो डिब्बा पानी लाने की थी। शैलेंद्र सिंह नेगी कक्षा 6 की जिम्मेदारी झाड़ू लगाना तथा दो डिब्बा पानी लाने की थी । दिन का भोजन तथा रात की सब्जी मेरे पिताजी बनाया करते थे। दाल तथा चावल बीनने की जिम्मेदारी सभी को अलग-अलग दी जाती थी । सबसे महत्वपूर्ण यह है कि एलपीजी गैस चूल्हा नहीं हुआ करता था । मिट्टी तेल स्टोव में खाना बनाते थे । अधिकांशतः रोटियां लकड़ी की आग में बनाते थे। शाम को जब खेलने या टहलने जाते थे तो रास्ते से लकड़ी भी उठाकर लाते थे क्योंकि अधिकांश निकटवर्ती क्षेत्र में जंगल था। ठंडा इलाका होने के कारण आपके पास रहना सबकी पसंद होता था। बाद के वर्षों में तीनो भाई समान उम्र के होने के कारण लड़ाई झगड़ा की स्थिति उत्पन्न होने लगी ।
इसलिए इसके लिए मेरे पिताजी द्वारा बहुत अच्छी एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाई गई । पर्ची सिस्टम था। प्रत्येक पर्ची में काम लिखा रहता था। एक पर्ची में रोटी बनाना तथा दो डिब्बा पानी लाना , दूसरी पर्ची में बर्तन साफ करना तथा दो डिब्बे पानी लाना, तथा तीसरी पर्ची में झाड़ू और दो डिब्बे पानी लाना लिखा होता था । पर्ची डाली जाती थी । सबसे छोटे वाले भाई को उठाने के लिए बोला जाता था । सत्येंद्र हमारे बीच उम्र में सबसे छोटा था । तब रोटी बनाने की जिम्मेदारी श्री धर्मेंद्र सिंह नेगी कक्षा 8 को, बर्तन की जिम्मेदारी मुझे कक्षा 7 तथा झाड़ू की जिम्मेदारी सत्येंद्र सिंह बिष्ट कक्षा 7 को मिली । यह पर्ची व्यवस्था आगे के वर्षों तक बनी रही। किसी को किसी से कोई शिकायत नहीं होती थी । सभी को अपना काम परफेक्ट रखना होता था। कार्य का मूल्यांकन एवं गुणवत्ता साफ साफ दिखाई देता था। जिम्मेदारी भी फिक्स हो जाती थी । इसलिए सब sincerely अपना काम करते थे। इसी का नतीजा है कि आज श्री अनूप सिंह बिष्ट और श्री धर्मेंद्र सिंह नेगी राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक हैं । श्री सत्येंद्र सिंह बिष्ट पहले गढ़वाल राइफल में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्त होने के बाद अभी राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि हम चारों भाई की नौकरी 20-21 साल में लग गई थी । 1 दिन भी कोई बेरोजगार नहीं रहा।
हम प्रतिवर्ष 30 जून को अपने गांव से विद्यालय चले जाते थे। 1 जुलाई से 30 दिसंबर तक विद्यालय चलता था । दशहरा तथा दीपावली में भी हम यही रहते थे । 1 जनवरी से 31 जनवरी तक शीत अवकाश होता था। 1 जनवरी को हम वापस अपने गांव वापस लौटते थे । फिर 31 जनवरी को हमारी वापसी विद्यालय को होती थी । इस बीच होली पर भी हम ही रहते थे। 16 जून से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश के लिए फिर गांव आते थे। अधिकांशतः इस अवधि में दशहरा, दीपावली, होली आदि पर्व हमने अपने गांव, मां व छोटे भाई बहनों से दूर अपने दोस्तों के साथ मनाया । गांव में मेरी मां ,मेरी छोटी बहन, तथा दो छोटे भाई रहते थे। तब यातायात के साधन बहुत कम थे । सड़कों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। हम सुबह अपने गांव, जो सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ था ,से रोडवेज या जीएमओ की मुंह वाली बस से डेरियाखाल आते थे और फिर वहां से कभी पैदल तो कभी जीप से लैंसडाउन जाते थे । लैंसडाउन गांधी चौक में गुमखाल के लिए टैक्सी लगी रहती थी । टैक्सी से गुमखाल पहुंचते थे । गुमखाल में कोटद्वार -पौड़ी वाली बस में बैठकर बुआखाल में उतरते थे और फिर वहां से पौड़ी, सीकू, पोखरीखेत, पातल वाली बस में सीकू जाते थे । यात्रा में हमें लगभग 11 से 12 घंटे लग जाते थे। तब सड़कों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी । मेरे गांव से सिसलडी -चमेठा तक लगभग 40 किलोमीटर कच्ची सड़क थी। मांडा खाल से सीकू तक 10 किलोमीटर भी कच्ची सड़क थी। गाड़ी की अधिकतम स्पीड 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा हुआ करती थी। गाड़ी में मुझे बहुत उल्टी आती थी । यात्रा का यह दिन मेरे लिए बहुत कठिन होता था। दिनभर भूखा भी रहना पड़ता था। स्थिति यह थी कि मुझे यात्रा करने से 1 दिन पहले से ही उल्टी का मन होने लगता था और गाड़ी देख कर मैं उल्टी करना शुरू कर देता था। कोई भी यात्री मुझे अपने बगल में नहीं बिठाना चाहता था क्योंकि मैं उल्टी करने के मूड से ही गाड़ी में चढ़ता था तो पहले से बैठा हुआ यात्री समझ लेता था । यह स्थिति मेरे लिए बहुत कष्टकारी होती थी । फिर मुझे खिड़की वाली सीट भी चाहिए होती थी। लगभग बेहोशी की हालत में यात्रा करनी होती थी। सत्येंद्र सिंह बिष्ट को भी बहुत उल्टी आती थी और हम बारी-बारी से गाड़ी की खिड़की से उल्टी किया करते थे और लोग हम पर हंसा करते थे।
उस दौरान मेरे विद्यालय में श्री त्रिलोक सिंह नेगी जी प्रधानाचार्य, श्री हरिश्चंद्र कैंथोला प्रवक्ता नागरिक शास्त्र, श्री इंदर सिंह रावत प्रवक्ता अर्थशास्त्र, श्री भगत सिंह रावत प्रवक्ता इतिहास , श्री दिगपाल सिंह बिष्ट प्रवक्ता समाजशास्त्र, श्रीमती कुंती थपलियाल प्रवक्ता हिंदी , श्री रमेश चंद्र प्रवक्ता अंग्रेजी, बाद में पीसीएस चयनित होने के उपरांत श्री रघुवीर सिंह नेगी प्रवक्ता अंग्रेजी, श्री नरेंद्र सिंह राणा सहायक अध्यापक गणित विज्ञान ,श्री रमेश चंद्र बहुगुणा सहायक अध्यापक गणित विज्ञान, श्री दलीप सिंह रावत सहायक अध्यापक व्यायाम, श्री केसर सिंह नेगी सहायक अध्यापक जीव विज्ञान, श्री ठाकुर सिंह नेगी सहायक अध्यापक अंग्रेजी, श्री जगमोहन सिंह नेगी सहायक अध्यापक हिंदी संस्कृत, श्री विधु सिंह रावत सहायक अध्यापक सामान्य, श्री भरत सिंह रावत सहायक अध्यापक सामान्य, श्री प्रदुमन सिंह बिष्ट सहायक अध्यापक कला आदि कार्यरत थे । कार्यालय स्टाफ में मुख्य लिपिक श्री राम सिंह नेगी, वरिष्ठ लिपिक श्री महावीर सिंह रावत, कनिष्ठ लिपिक श्री जगमोहन सिंह नेगी, कार्यालय सहायक श्री विपिन थपलियाल कार्यरत थे। चतुर्थ श्रेणी में श्री खुशाल सिंह नेगी, श्री दिनेश सिंह बिष्ट, जोत सिंह बिष्ट ,श्री मदन सिंह नेगी ,श्री प्रेम सिंह चौहान, कुशाल सिंह आदि कार्यरत थे। विद्यालय की छात्र संख्या लगभग 400 से 500 तक हुआ करती थी। विद्यालय में पढ़ाई का बहुत अच्छा वातावरण था। सभी शिक्षक बहुत मेहनत और लगन से अध्यापन कार्य करते थे। विद्यालय का अनुशासन बहुत अच्छा था। विद्यालय में लगातार खेल गतिविधियां होती रहती थी। विद्यालय में समय-समय पर पाठ्य क्रियाकलाप हुआ करते थे। विद्यालय का प्रिय खेल फुटबॉल था। विद्यालय की फुटबॉल टीम राज्य एवं जनपद स्तर पर अपना प्रदर्शन कर विभिन्न उपलब्धियां प्राप्त करती थी। राष्ट्रीय पर्व एवं विशेष दिवसों का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता था । क्षेत्र के लगभग 15 से 20 गांव के लोग इन कार्यक्रमों को देखने के लिए आते थे। एक उत्साह का वातावरण रहता था। क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय ,संस्कृति विभाग तथा जनपद स्तरीय अन्य विभागों से अधिकारी समय-समय पर विद्यालय में आते थे । मुझे याद है कि जब मैं कक्षा 9 में पढ़ता था तब जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल भी हमारे विद्यालय में आए थे । विद्यालय में विभिन्न पाठ्य सहगामी गतिविधियां यथा वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान , क्विज आदि का आयोजन होता था। विद्यालय में उदंडी बच्चों की संख्या बहुत थी । विद्यालय का अनुशासन अच्छा होने के कारण इन पर बहुत अधिक लगाम लगी रहती थी । फिर भी शरारती बच्चे कुछ न कुछ खास करते रहते थे। विद्यालय की प्रार्थना सभा में प्रार्थना , देश गान, राष्ट्रगान, नीति वचन, समाचार वाचन, व्यायाम आदि होता था । सप्ताह के सभी दिन यूनिफॉर्म अनिवार्य थी । यदि किसी दिन बिना यूनिफार्म के आने को कहा जाता था तो खुशी का ठिकाना नहीं होता था। यह भी उल्लेखनीय है कि इस विद्यालय के पास लगभग 200 नाली से अधिक जमीन होगी । जब हम यहां पढ़ते थे तो विद्यालय की भूमि पर प्रत्येक बच्चे को क्यारियां दी जाती थी और हम उनमें आलू ,अदरक, प्याज, मिर्च, पहाड़ी मूली, दाल, हरी सब्जियां आदि की खेती करते थे । कृषि विषय का अध्ययन एवं प्रयोगात्मक शिक्षण यहीं पर होता था। हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री त्रिलोक सिंह नेगी जी कृषि विषय को स्वयं पढ़ाते थे तथा कृषि की बारीकियों को हमें समझाते थे । हम इस विषय के पीरियड की हमेशा प्रतीक्षा करते थे क्योंकि कक्षा से बाहर तथा प्रयोगात्मक रूप से सीखने में हम सभी बच्चों को बहुत रुचि रहती थी। सभी बच्चों को आपस में हंसी मजाक और छेड़खानी का भी मौका मिल जाता था और अपनी-अपनी क्यारी को अच्छा करते हुए अपना प्रदर्शन दिखाने का भी। सभी बच्चों में अच्छा करने की होड़ रहती थी। जो पैदावार होती थी उसमें कुछ हिस्सा बच्चों को मिलता था और कुछ हिस्सा लोगों को बेचा जाता था, जिसकी धनराशि विद्यालय कोष में जमा होती थी ।
वर्तमान में कृषि एवं उद्यान विषय को पाठ्यक्रम में मुख्य विषय के रूप में सम्मिलित करने की सर्वाधिक आवश्यकता प्रतीत होती है। इस विद्यालय का फुटबॉल मैदान बहुत बड़ा है तथा स्टेडियम बनने के लिए बहुत उपयुक्त स्थल है । यह जनपद पौड़ी गढ़वाल के मुख्यालय से मात्र 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है I जनपद मुख्यालय के निकट फुटबॉल मैदान या स्टेडियम या फुटबॉल अकादमी बनाने के संबंध में इस पर विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही इस विद्यालय के आसपास लगभग 300-400 बीघा हल्की ढाल वाली भूमि स्थित है जिस पर क्षेत्र की ठंडी जलवायु होने के कारण सेब, नाशपाती, अखरोट, खुबानी, आडू आदि का बागान आसानी से तैयार किया जा सकता है। आलू उत्पादन के लिए भी यह भूमि अत्यधिक लाभप्रद हो सकती है। इस भूमि का उपयोग दलहन उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। वैसे मैंने इस भूमि के राजस्व अभिलेख नहीं देखे हैं लेकिन मेरा अनुमान है कि यह ग्राम समाज /केसर हिंद भूमि होगी । कभी इस क्षेत्र में घंडियाल नामक स्थान पर वर्षा जल संग्रहण का एक बेहतरीन चाल खाल हुआ करता था। इसी प्रकार के अन्य वर्षा जल संग्रहण के चाल खाल बनाकर तथा इस भूमि का बेहतर उपयोग कर उदाहरण पेश किया जा सकता है।इस विद्यालय की उत्तर पूर्व दिशा में बांज का घना जंगल है । विद्यालय सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है । इस विद्यालय से हिमालय की एक लंबी श्रृंखला दिखाई देती है । ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पर्यटन की दृष्टि से बहुत उपयुक्त स्थल है । यदि भविष्य में इसमें फल पट्टी या आलू या दलहन पट्टी विकसित होती है तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्वरोजगार के साथ ही पलायन को रोकने में बहुत कारगर साबित होगा।साथियों माध्यमिक शिक्षा की यात्रा बहुत रोचक एवं यादगार रही है । मुझे लगता है कि हमारी पीढ़ी के सभी लोगों ने इसी प्रकार से अपनी पढ़ाई की है।
नई दिल्ली: सोमवार को बारिश के कारण मामूली बढ़ोतरी के बाद मंगलवार सुबह यमुना के जलस्तर में गिरावट आई, लेकिन यह अब भी खतरे के निशान 205.33 मीटर से ऊपर है
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एक पंप हाउस में पानी भर जाने के कारण प्रभावित हुए वजीराबाद जल शोधन संयंत्र ने पूर्ण क्षमता से संचालन आरंभ कर दिया है। केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ पर निगरानी रखने वाले पोर्टल के अनुसार, यमुना का जलस्तर सोमवार देर रात 11 बजे 206.01 मीटर था, जो मंगलवार सुबह आठ बजे गिरकर 205.67 हो गया।
इसके शाम सात बजे तक और गिरकर 205.41 मीटर होने की संभावना है। हरियाणा के यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज से जलप्रवाह में पिछले दो दिन में कमी आई है तथा इसमें और कमी होने की उम्मीद है।
नदी का जलस्तर पिछले बृहस्पतिवार को 208.66 मीटर के चरम पर पहुंच गया था, जिसके बाद से यह धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उफनती यमुना के कारण वजीराबाद में एक पंप हाउस में पानी भर जाने से वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जल शोधन संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) का परिचालन बाधित हो गया था, जिससे पानी की आपूर्ति में 25 प्रतिशत की गिरावट आई। ओखला डब्ल्यूटीपी में शुक्रवार को और चंद्रावल में रविवार को जल शोधन शुरू हो गया था। केजरीवाल ने मंगलवार को ट्वीट किया, वजीराबाद जल शोधन संयंत्र ने पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया है। अब सभी डब्ल्यूटीपी पूर्ण क्षमता से संचालित हो रहे हैं।
डीजेबी (दिल्ली जल बोर्ड) ने कड़ी मेहनत की। डीजेबी को धन्यवाद। शहर के कई हिस्से एक सप्ताह से जलभराव और बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। शुरुआत में आठ और नौ जुलाई को बारिश के कारण जलभराव की समस्या पैदा हुई थी। इन मात्र दो दिन में शहर के मासिक बारिश कोटे की 125 प्रतिशत वर्षा हुई थी।
इसके बाद, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा सहित ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। नदी का जल बृहस्पतिवार को 208.66 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसने सितंबर 1978 में 207.49 मीटर के सबसे अधिक जलस्तर के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था।