देश के शहीद भगतसिंह राजगुरू सुखदेव को शहीद दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित करने हेतु पूर्व वर्षो की भातीं इस बार भी स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण समीति के तत्वाधान मे कार्यक्रम सिटीबैंकट हाल देहरादून मे सम्पन्न हुआ।इसमे संयुक्तनागरिकसंगठन सहित अन्य संस्थाओ के प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद थे।
लै.कर्नल बीएम थापा,ब्रिगेडियर केजीबहल,भद्र सिंह नेगी,जगमोहन मैदिरतता,जीएस जससल,महिपाल सिंह रावत,संदीप शास्त्री,वीके गर्ग, लै.कर्नल जीएस गम्भीर,मुकेश नारायण शर्मा,कुसुम धसमाना,डॉक्टर मुनिराम उपेंद्र दत्त बिजलवान ,शक्ति प्रसाद डिमरी,संजय अमन,उदित नारायण शर्मा सहित सेनानी परिवारो के उत्तराधिकारी भी भारी संख्या मे शामिल हुए। वकताओ ने देश के नीतीनियंताओ को शहीदो केhआदर्श,चरित्र,नैतिकता,ईमानदारी,और देशप्रेम के जज्बातो से प्रेरणा लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कोटद्वार। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड अशोक कुमार की पहल पर प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सुखवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार शेखर चन्द्र सुयाल व क्षेत्राधिकारी ऑपरेशन/नोडल अधिकारी वैभव सैनी के पर्यवेक्षण. एएचटीयू प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह खोलिया के नेतृत्व में दो माह हेतु प्रदेश स्तर पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन मुक्ति” अभियान की थीम भिक्षा नहीं शिक्षा दें के क्रम में ऑपरेशन मुक्ति टीम की महिला आरक्षी विद्या मेहता द्वारा कुछ बच्चों का चिन्हीकरण कर उनका दाखिला *अंकुर The SEEDLINGS आत्मदीप भव निशुल्क शिक्षण संस्थान पदमपुर सुखरो कोटद्वार मे कराया गया। संस्थान का संचालन डा0 एसके खट्टर द्वारा किया जा रहा है। संस्थान में बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल निशुल्क कराई जाती है।
उक्त बच्चों के माता-पिता द्वारा ऑपरेशन मुक्ति टीम जनपद पौड़ी पुलिस का धन्यवाद ज्ञापित किया गया कि हमारे बच्चों को जो आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे थे शिक्षा से जोड़ने के लिए व उन्हें शिक्षित कर हमारे बच्चों का भविष्य उज्जवल करने का अथक प्रयास कर रही है।
राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू अपने शांत वातावरण और हरे-भरे माहौल की वजह से इस राज्य का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरी भरी पहाड़ियों, निर्मल झीलों, सुंदर मंदिरों और अनेक धार्मिक स्थानों के लिए प्रसिद्द है।
माउंट आबू एक ऊँचे अरावली पर्वत की आच्छादित श्रृंखलाओं घिरा हुआ है।इसे आबू पर्वत के नाम से भी जानते हैं।इसकी ऊँचाई समुद्र तल से 6000 फीट है।माउंट आबू पहुँचने के लिए नजदीकी रेलवे-स्टेशन अबू रोड़ है।अबू रोड़ माउंट आबू की तलहटी में स्थित है।ये तो राजस्थान के अन्य स्टेशन की ही तरह है।माउंट आबू एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है जैसे लैंसडौन मसूरी आदि,लेकिन उनसे भिन्न है।उत्तराखंड से माउंट आबू की दूरी 1100 से 1300 किलोमीटर है।यहाँ पहुँचने के लिए अबू रोड़ रेलवे-स्टेशन से बस टैक्सी बराबर मिलती हैं जिसकी दूरी 28 किलोमीटर पड़ती है।यहाँ का मौसम पल पल बदली होता रहता है।दिन में कई बार वातावरण बदल जाता है। यहाँ पत्थरों की बड़ी बड़ी शिलाएं हैं।पत्थर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि कितना बड़ा व कहाँ तक फैला है।प्रत्येक पत्थर पर एक विशेष आकृति खुदी हुई है,जो गोलनुमा आकार में है।यहाँ के स्थानीय लोगों को पूछने पर वे भी न बता सके कि ये आकृति कैसी बनी है।यहाँ पर जो भी आवासीय भवन हैं वे सब टिन शैड के बने हैं।
यहाँ एक छावनी क्षेत्र भी है।यह स्थान पर्यटकों के घूमने फिरने व मनोरंजन के लिए सुविधाजनक स्थान है।यहाँ का मौसम सर्दियों के लिए थोड़ा कष्टकारी है,शेष दिनों के लिए एक समान वातावरण है।बारिश,धूप ,कोहरा सब समान रूप से है।विशेषतः गर्मियों के लिए सगून भरा वातावरण रहता है।
यहाँ पर भारतीय सेना की एक टुकड़ी भी स्थित है जो कि विशिष्ट मेहमानों व सैन्य बल के लिए आवाभगत में व्यस्त रहती है।वर्तमान में यहाँ पर उच्चकोटि की व कयी गैलेन्टरी अवार्ड,सैन्य प्रशस्ति पत्र से सम्मानित बटालियन गढ़वाल राइफल्स की 19 वाहिनी की टुकड़ी मौजूद है।इस यूनिट का अब यहाँ तैनाती का आखिरी वर्ष है।
माउंट आबू पूर्ण रूप से पहाड़ी क्षेत्र है।चारों तरफ बड़े बड़े विशालकाय पत्थर,गुफाएं,छोटी प्रजाति के पेड़ पौधे हैं।पेड़ पौधों में खासकर खजूर आदि हैं।यहाँ मंदिरों की भरमार है।इस स्टेशन में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस की अकादमी भी है।जहाँ से ट्रेनी पुलिस अधिकारी तैयार होते हैं।यह एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्टेशन है।पक्के भवन बनाने की अनुमति नहीं है।ये हिल स्टेशन मंदिरों,आलीशान होटलों,विशालकाय झील व विशेष प्रकार के आकृति वाले पत्थरों के लिए प्रसिद्ध है।जो पर्यटकों व सैलानियों का मन मोह लेता है।यहाँ पर बहुत लम्बी चौडी झील है। जिसे नक्की झील के नाम से विख्यात है।इस झील की गहराई 65- 70 फीट की गहराई है।यह झील दो भागों में विभाजित है।एक हिस्सा सिविलियन नागरिकों के लिए तथा दूसरा भाग सैन्य बल,अर्द्धसैनिक बल,उनसे सम्बन्धित परिवारों के लिए आरक्षित है।इन सुरक्षा बलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।इसका संचालन सी आर पी एफ करती है।उसके तैराकी कमांडो बोट को चलाते हैं।लाइफ जैकेट पहननी अनिवार्य है।यहाँ निजी स्कूल के अलावा केन्द्रीय विद्यालय भी है।जो भी सेना की एक बटालियन यहाँ पर रहती है उसके परिवार जनों को सरकारी आवास ,कैन्टीन,अस्पताल,मनोरंजन ,फल सब्जी आदि की समुचित व्यवस्था है।बाहर से आने वाले सैन्य बलों व उनके परिवारजनों के लिए रहने,ठहरने,भोजन आदि की चाक चौबंद व्यवस्था रहती है।बाजार भी नजदीक ही है।सिविल आबादी भी खूब है।
यहाँ अधिकतर गुजराती समुदाय के पर्यटक आते हैं,क्योंकि यह राजस्थान का आखिरी स्टेशन है।यह जिला सिरोही,राजस्थान में पड्ता है।इसी स्टेशन से गुजरात राज्य की सीमा आरम्भ हो जाती है। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद की दूरी मात्र 180 किलोमीटर है।यहाँ विदेशी पर्यटक भी देखे जा सकते हैं।
माउंट आबू का सबसे उच्च स्थान गुरुशिखा है।वहाँ पर एक भव्य व मनमोहक मंदिर है।नक्की झील के सड़क के ऊपर मेंढकनुमा TOD ROCK एक विशालकाय पत्थर की अनोखी आकृति है।जिसे लोग देखने जाते हैं।यह झील के पास सड़क से 400 मीटर की दूरी पर है।हफ्ते के शनिवार रविवार को इस हिल स्टेशन में भीड़तंत्र इतना बढ जाता है कि पाँव रखने की जगह नहीं होती।पास ही दिलवाडा एक जगह है वहाँ भी मंदिर है।मंदिरों की इतनी संख्या है कि गिनती असम्भव है।
यहाँ जंगली भालू कभी भी देखे जा सकते हैं लेकिन ये किसी को भी जनहानि नहीं पहुंचाते हैं।दिन में भी सडकों पत्थरों ,आवासीय घरों में विवरण करते देखे जा सकते हैं।भालू सेना के लंगर ,आवासीय परिसर में जूठा भोजन व पानी पीने आते हैं।लेकिन नुकसान की कोई खबर नहीं होती।
इस अरावली पहाड़ी पर कोई भी जल स्रोत नहीं है।नहाने,कपड़े धोने,बगीचे की सिचाई के लिए झील का पानी ही पम्पिग से प्रयोग होता है।सेना के लिए पेयजल के लिए वाटर प्लान्ट लगा है।ये यूनिट यहाँ पर स्वतंत्र है जो अपनी दैनिक दिनचर्या व सैन्य पर्यटकों के आवभगत में व्यस्त है।
लेखक को अपनी यूनिट में आने पर बड़ी प्रसन्नता हुई वे भी इसी बटालियन से सेवानिवृत्त हुए हैं।भले ही उस दौर के लोग नहीं मिले लेकिन जिस यूनिट में शुरुआती दिन बिताये याद आ ही जाती है।
विश्व वानिकी दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से “उत्तराखंड में चीड़ के पेड़ों से हो रहे नुकसान तथा इसको रोकने हेतु वृक्ष संरक्षण अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता” विषय पर ऑनलाइन परिसंवाद का आयोजन किया गया जिसमें पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यरत अनेक सामाजिक संस्थाओं के पर्यावरण प्रेमियों ने अपने विचार व्यक्त किए। संवाद का निष्कर्ष था कि चीड़ के पेड़ों को अगर फैलने से नहीं रोका गया तो यह भविष्य में खेती,मिश्रित वनों को कुप्रभावित करेगा जिसका विपरीत असर जलस्रोतों पर पड़ेगा जो बढ़ते तापमान और बारिश में कमी का भी मुख्यकारक सिद्ध होगा।कुछ लोगो का विचार था की चीड को राज्य की आय का स्रोत बनाने की अपेक्षा जंगलों तथा खेतों में बांज, बुरांश, देवदार, मोरू आदि वृक्षों का रोपण, पर्यावरण बचाने के लिए अधिक उपयोगी होगा।यह भी विचार थे की ज्वलनशील चीड़ के जंगलों की आग से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति असंभव है तथा यह वन्यजीवों के लिए भी घातक है क्योकि वनो मे फलदार वृक्षों के अभाव में वन्यजीव आबादी की ओर रुख कर रहे है और फसलों तथा आम जनजीवन को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रतिभागियो का यह भी मन्तव्य रहा की प्रतिवर्ष चीड़ की पत्तियो(पीरुल) के रूप मे प्राप्त अगाध वन संपदा जलकर खाक हो जाती है इसलिए इसका बिजली निर्माण, खाद आदि बनाने मे सदुपयोग किया जाना चाहिए,परन्तु सरकारी तंत्र द्वारा इस पर ईमानदारी से काम भी नहीं हुआ है जो शर्मनाक है। यह भी कहा गया की 1980 में सरकार द्वारा 1000 मीटर से ऊपर के वनों में हरित पाटन 10 वर्ष वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया गया था जो आज तक लागू है। इसको जनहित मे खत्म किया जाना जरूरी है। संवाद में भाग लेने वालो मैं पर्यावरणविद सुरेशभाई, पद्यश्री कल्याण सिंह रावत, आंदोलनकारी जगमोहन सिंह नेगी, पर्यावरण प्रेमी शांतिप्रसाद नौटियाल, चौधरी ओमवीर सिंह, मधु त्यागी, दिनेश भंडारी, जगदंबा प्रसाद मैथानी, अंबिकानंद शर्मा, दिनेश सेमवाल, ताराचंद गुप्ता, जगदीश बावला, सुशील त्यागी, प्रदीप कुकरेती आदि शामिल थे।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं। शक्ति की पूजा का महापर्व नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हो रहा है और इसी दिन से नव संवत्सर की भी शुरुआत हो जाती है। इस बार नवरात्र में चार योग का विशेष संयोग बन रहा है। पूरे 9 दिनों के नवरात्र के साथ माता का आगमन नौका और प्रस्थान डोली पर होगा जो बहुत शुभकारी बताया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त
इस बार नवरात्रि पर बनने वाले विशेष महासंयोग के बारे में ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह बेहद खास है। चैत्र मास की नवरात्रि इस बार बुधवार, 22 मार्च को शुरू हो रही है जो 30 मार्च तक रहेगी। जो संपूर्ण 9 दिवसीय नवरात्र है। इसमें तिथियों की घटबढ़ नहीं है। वहीं प्रतिपदा तिथि 21 मार्च रात में 11 बजकर 4 मिनट पर लग जाएगी इसलिए 22 मार्च को सूर्योदय के साथ नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होगी।
इस बार 110 वर्षों में बन रहा है महासंयोग इस वर्ष मां का आगमन नौका पर है, जिसे सुख-समृद्धि कारक कहा जाता है। पूरे 9 दिनों के नवरात्र में मां के 9 स्वरूपों की पूजा होगी। ज्योतिषाचार्यों ने नवरात्र के संयोग के बारे में बताया कि चार ग्रहों का परिवर्तन नवरात्र पर देखने को मिलेगा. यह संयोग 110 वर्षों के बाद मिल रहा है। इस बार नव संवत्सर लग रहा है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने पृथ्वी की रचना की थी. इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस वर्ष के राजा बुद्ध और मंत्री शुक्र ग्रह होंगे जिसके चलते शिक्षा क्षेत्र में बहुत क्रांति के अवसर मिलेंगे और महिलाओं का भी विशेष उत्थान इस वर्ष दिखाई पड़ेगा।
चैत्र नवरात्रि पूजन विधि कलश स्थापना की विधि शुरू करने से पहले सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनें. उसके बाद एक साफ स्थान पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा स्थापित करें. इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें. एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें. इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर कलावा बांधें. कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर अशोक के पत्ते रखें. एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें. इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें. इसके बाद दीप आदि जलाकर कलश की पूजा करें. नवरात्रि में देवी की पूजा के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश स्थापित किया जाता है.
हल्द्वानी : आईजी कुमाऊं नीलेश आनंद भरणे ने आज अवैध स्मैक तस्करी का बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पूरे कुमाऊं में यह अब तक की सबसे बड़ी अवैध स्मैक की खेप के पकड़ी गई है जिसकी लोकल में कीमत करीब 52 लाख रुपए मानी जा रही है।
एस० ओ०जी० नैनीताल और कोतवाली हल्द्वानी की संयुक्त टीम द्वारा मुखबीर की सूचना पर हल्द्वानी के रामपुर रोड बेलबाबा के पास चैकिंग के दौरान 01 मोटर साईकिल संख्या- यू0के0 06एएस -4218 डिस्कवर को रोक कर चैक किया गया तो अभियुक्त वीरेन्द्र पाल पुत्र बुद्धसेन निवासी गांव बिहारीपुर आँवला थाना अलीगंज जिला बरेली उत्तर प्रदेश उम्र 40 वर्ष के कब्जे से 522 ग्राम अवैध स्मैक बरामद कर गिरफ्तार किया गया।
अभियुक्त के विरूद्द कोतवाली हल्द्वानी में एफआईआर न0-151/23, धारा 8/21/60 एनडीपीएस एक्ट के अन्तर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया।
पुलिस टीम 1- श्री हरेन्द्र चौधरी प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हल्द्वानी। 2– श्री राजवीर सिंह नेगी (प्रभारी एसओजी ) । 3-उ0नि0 श्री पंकज जोशी चौकी प्रभारी टी0पी0 नगर। 4-उ0नि0 प्रवीण कुमार कोतवाली हल्द्वानी। 5– हे0 कानि0 कुन्दन कठायता ( एसओजी )। 6– हे0कानि0 त्रिलोक सिंह ( एसओजी )। 7– कानि0 दिनेश नगरकोटि ( एसओजी )। 8– कानि0 भानू प्रताप (एसओजी )। 9– कानि 0 अनिल गिरी (एसओजी )। 10-कानि0 तारा सिंह कोतवाली हल्द्वानी। 11– कानि0 अनिल टम्टा कोतवाली हल्द्वानी।
गाजियाबाद:उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जहां महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है वहीं कुछ महिला हेल्प लाइन में काम करने वाले लोग महिलाओं को न्याय दिलाने की बजाय उनसे थाने और पुलिस चौकी के चक्कर लगवा रहे हैं। लेकिन सरकार के दावों को खोखला करने के लिए बागपत पुलिस कोई भी कमी नहीं छोड़ रही है।
कोमल जिसकी शादी 16 फरवरी 2021 में बागपत खेकड़ा गांव मैं विशाल धामा पुत्र मनोज धामा के घर में हुई थी शादी के कुछ दिन पश्चात ही ससुराल वालों से पीड़िता कोमल पर दहेज के कारण वाद विवाद होने लगा जिसके कारण पीड़िता को उसके ससुराल वालों ने पीड़िता को टॉर्चर कर कर एक कमरे में बंद कर दिया पीड़िता 2 दिन तक भूखी प्यासी कमरे में बंद रहे बन रही उसके 2 दिन बाद उसके पिताजी की 2 दिन बात ना होने के कारण लड़की के पिता ने तुरंत लड़की की ससुराल पहुंचे और वहां पहुंच कर लड़की के पिता ने उसके ससुराल वालों से कहा मेरी लड़की से मुझे मिलवा दीजिए तभी लड़की की ससुराल वालों ने पीड़िता के पिता को गाली गलौज और बदतमीजी शुरु कर दी जिसके चलते पीड़िता के पिता ने 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को अवगत कराया तभी वहां पुलिस पहुंची पुलिस ने उस लड़की को उसके पिता के हवाले कर कार्यवाही शुरू कर दी पीड़िता 2 साल बाद अपनी ससुराल पहुंची वहां पहुंचकर पीड़िता को उसके ससुराल वालों ने घर में नहीं घुसने दिया तभी पीड़िता अपनी ससुराल दरवाजे से अंदर तो हो गई मगर उसके कमरे में नहीं जाने दिया उसके साथ ससुर ने पीड़िता ने तभी 112 पर कॉल करें और वहां पुलिस को बुलाया पुलिस भी वहां पहुंच कर कुछ नहीं कर पाई 2 दिन तक लड़की सीढ़ीयों में पड़ी रही भूखी प्यासी फिर भी उसके ससुरालियों ने उसे उसके घर में घुसने नहीं दिया और यह देखते हुए पीड़िता ने खुद हिम्मत करते हुए जबरन अपने कमरे में घुस गई और यह देखते हुए पीड़िता के साथ ससुर घर से फरार हो गए और अब पीड़िता अपनी ससुराल में रह रही है। पीड़िता इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन पुलिस पीड़िता की शिकायत पर कोई एक्शन नहीं ले रही है।
कोटद्वार। अदालत ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों आरोपितों पुलकित आर्य, सौरभ और अंकित पर आरोप तय कर दिए हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच आज पुलिस तीनों आरोपितों को जेल से अदालत लेकर पहुंची।
इस मामले की सुनवाई कोटद्वार की एडीजे प्रतिभा तिवारी की अदालत कर रही हैं। मामले की जांच कर रही एसआईटी की अदालत में दायर की गई चार्जशीट के आधार पर इन तीनों आरोपितों पर अदालत ने आरोप तय किए हैं, जिसमें हत्या की 302 धारा सहित अन्य कई संगीन धाराएं लगाई गई हैं। अब इस मामले की आगे नियमित सुनवाई की जाएगी। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 28 मार्च की तय की है।
इसी दौरान अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए नजर आए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा कांटा। हंगामा कांटने को लेकर कार्यकर्ताओ को गिरफ्तार कर कोटद्वार कोतवाली लाया गया। इस मौके पर कोर्ट के बाहर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
उत्तराखंड के लोगों को फिर मंहगाई का झटका लगने वाला है। एक अप्रैल से बिजली दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्टस की माने तो उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 12 फीसदी तक बढ़ोतरी करने पर मुहर लगा दी है। आयोग 23 मार्च को बढ़ी हुई दरें जारी कर देगा।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ओर से दिया गया बिजली दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी का प्रस्ताव वेबसाइट पर जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि इस साल यूपीसीएल ने नियामक आयोग के सामने बिजली दरों में 16.96 प्रतिशत, यूजेवीएनएल ने करीब 2.43 प्रतिशत, और पिटकुल ने 9.27 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव नियामक आयोग के समक्ष रखा था।
बताया जा रहा है कि आयोग ने इन सभी प्रस्तावों पर प्रदेशभर में जनसुनवाई कर हितधारकों और तीनों ऊर्जा निगमों की बातें सुन मंथन किया है। बताया जा रहा है कि अब 23 मार्च को आयोग द्वारा नई दरें जारी कि जा सकती है। यह दरें प्रदेश में एक अप्रैल से लागू हो जाएंगी। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अगर ये बढ़ोतरी की जाती है तो इससे प्रदेश के 27 लाख 50 हजार 872 उपभोक्ता प्रभावित होंगे।