मैं _ हूं, एक भारतीय निवासी/ का पति/पत्नी/बेटा/बेटी हूं, उम्र_35 हूं।वर्तमान में ___द्वारकादिल्ली___ पर रह रहे हैं, इसके द्वारा निम्नलिखित को सत्यनिष्ठा से स्वीकार और घोषित करते हैं:
मृतक _मनोरथ निराला एक मकान है जो शालीमार गार्डन मै पंजीकृत हैं का नाम) शेयर सर्टिफिकेट नंबर के तहत पंजीकृत थे। अद्वितीय संख्या वाले __ से _ तक।
वह (शेयरधारक का नाम), जिसका __मनोरथ निराला को निधन हो गया।
कि मैं मृतक का वैध उत्तराधिकारी हूं। मैं मृतक का (कौन सा रिश्ता) बेटी__ हूं।
मैं मृतक के स्वामित्व वाली उपरोक्त प्रतिभूतियों पर किसी भी स्वामित्व अधिकार का दावा नहीं करना चाहता। मैं उपरोक्त प्रतिभूतियों के संबंध में मेरे वर्तमान और भविष्य के किसी भी और सभी दावों को माफ करने के लिए सहमत हूं।
मैं एतद्द्वारा घोषणा करता हूं कि आवेदक के नाम पर उपरोक्त प्रतिभूतियों को स्थानांतरित करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
मैं इसे उचित कंपनी अधिकारियों को सौंपने के लिए इस घोषणा पर हस्ताक्षर कर रहा हूं।
मैं एतद्द्वारा प्रमाणित करता हूं कि ऊपर दी गई जानकारी मेरी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार सटीक है।
पौड़ी: रिखणीखाल कंडलसेरा (द्वारी) -भौन सड़क मार्ग को बने लगभग 20 साल हो गये हैं। तब से सिर्फ एक ही बार 10 साल पहले इसका डामरीकरण हुआ है।तब से अभी तक विभाग द्वारा दुबारा डामरीकरण नहीं किया गया है।
सड़क की हालत बहुत गम्भीर व जर्जर है।रेत बजरी उखड़ चुकी है।स्थानीय जनता कयी बार गुहार लगा चुकी है लेकिन कौन सुने।सड़क पर सफर करना कठिन हो गया है।इस क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व भी काफी है।जितनी बार सफर करते हैं उतनी बार सरकार को कोसते रहते हैं। सुना है कि अब 30 नवम्बर 2023 तक सडकें गढ्ढा मुक्त हो रही हैं। गढ्ढा मुक्त न होने पर निलंबन की कार्रवाई होने को कहा जा रहा है।
अब लोग इस आस में बैठे हैं कि इस लहर में इस सड़क का भी भला हो जाये।सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
देहरादून : आज दिनांक 21 नवम्बर, 2023 को ’’ऑपरेशन मुक्ति’’ के सम्बन्ध में आमजन को जागरूक किये जाने हेतु पुलिस लाईन देहरादून में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में श्री अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस का यह अभियान भिक्षा नहीं शिक्षा की ओर अग्रसर है। ’हर हाथ में हो किताब’ इस उद्देश्य के साथ पुलिस विभाग द्वारा अन्य संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेशन मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनका बचपन देना जरुरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चों को भिक्षा देकर हम उनकी मदद नहीं करते, बल्कि उन्हें भिक्षावृत्ति की ओर धकेल रहे हैं, जिसके दूरगामी परिणाम समाज के हित में नहीं हैं।
ड्रॉपआउट की समस्या पर उन्होंने ऑपरेशन मुक्ति टीम को सम्बोधित करते हुए कहा कि बच्चों की स्कूली शिक्षा दीक्षा एवं कल्याण के लिए प्रचलित सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर बच्चों को उनसे भी लाभान्वित करने का प्रयास करें। वर्ष 2017 से प्रारम्भ किये गये इस अभियान में अभी तक 3603 बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया गया है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ऑपरेशन मुक्ति अभियान में पुलिस कर्मियों की विशेष कार्ययोजना से मिले सकारात्मक परिणाम हम सबके सामने हैं।
इससे पूर्व कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड द्वारा अभियान के अन्तर्गत विद्यालयों में दाखिला कराये गये बच्चों को आवश्यक पाठन सामग्री वितरित की गयी। कार्यक्रम में राजकीय प्राथमिक विद्यालय शिवनगर सेलाकुई, राजकीय प्राथमिक विद्यालय रायपुर, प्राथमिक स्कूल रानीपोखरी एवं खुड़बुड़ा के बच्चों द्वारा मनमोहक कविता का प्रस्तुतिकरण किया गया। इस अवसर पर अभियान में सहयोग करने वाले आरोग्यधाम अस्पताल के डॉ विपुल कंडवाल, आदित्य बिड़ला के जोनल हेड डॉ0 अभिषेक कपूर, एस0डी0एफ0सी0 के सर्किल हेड डॉ बकूल सिक्का, एडिटर श्री मोहम्मद सलीम सैफी, रिटायर्ड बैंक मैनेजर श्री एस0पी0 जयसवाल, बचपन बचाव आन्दोलन से सुरेश उनियाल, रिटार्ड साईन्टिस्ट डॉ टी0एन0 जौहर को पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड द्वारा सम्मानित किया गया।
अभियान की थीम-’’भिक्षा नहीं, शिक्षा दें’’ व “Support to educate a child”
अभियान का स्थान- अभियान समस्त जनपद के मुख्य-मुख्य स्थान जहां बच्चों द्वारा द्वारा भिक्षावृत्ति की जाती है, पर चलाया जाता है।
अभियान का उद्देश्यः- भिक्षावृत्ति, बालश्रम, बच्चों के साथ होने वाले अपराधों पर प्रभावी रोकथाम करना, बच्चों को भिक्षा न दिये जाने के सम्बन्ध में जनता को जागरूक करना तथा भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को शिक्षा हेतु प्रेरित करना व उनके पुनर्वास हेतु नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करना।
अभियान की टीमः- जनपद देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल में चार टीम (उपनिरीक्षक-1, आरक्षी-4), (04 टीमों में से 01 टीम एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की)। शेष जनपदों में एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम द्वारा उक्त अभियान को चलाया गया। रेलवेज में भी एक टीम (उपनिरीक्षक-1, आरक्षी-4) का गठन किया गया। प्रत्येक टीमों की सहायता हेतु 01-01 विधिक (अभियोजन अधिकारी) एवं टेक्निकल टीम (डी0सी0आर0बी0) अभियान तीन चरणों में सम्पादित किया गया हैः-
प्रथम चरणः- (Observation Period) भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों व उनके परिवारों का पूर्ण विवरण संलग्न प्रारूप में तैयार करना तथा ऐसे बच्चे जिनका विद्यालयों/डे केयर में दाखिला किया जाना है, का चिन्हिकरण करना।
द्वितिय चरणः- (Awareness/Enforcement Period)समस्त स्कूल-कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों, महत्वपूर्ण चौराहों, सिनेमाघरों, बस व रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों आदि स्थानों पर बच्चों को भिक्षा न दिये जाने के सम्बन्ध में बैनर, पोस्टर, पम्पलेट, नुक्कड़ नाटक, लाउड स्पीकर Short Movie सोशल मीडिया आदि के माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाकर जनता को जागरूक करना।
तृतीय चरणः-(Enforcement/Rehab Period) भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को भिक्षावृत्ति से हटाकर उनके तथा उनके माता-पिता की कॉउन्सलिंग कर बच्चों को शिक्षा प्रदान करने तथा उनके माता-पिता को रोजगार दिलाने का प्रयास करना। बच्चों के पुनः भिक्षावृत्ति में लिप्त पाये जाने पर उनके माता/पिता के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत कर कार्यवाही करना तथा किसी भी प्रकार का संदेह होने पर डी0एन0ए0 टेस्ट की कार्यवाही करना।
इस कार्यक्रम मे श्री ए0पी0 अंशुमान (अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था), श्री करन सिंह नगन्याल (पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र), श्री अजय सिंह, (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून) सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून:भाजपा समर्थक मंच के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष सचिन दीक्षित ने आज दिनांक 21 नवंबर 2023 को मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम देहरादून से शिष्टाचार भेंट करते हुए शहर के विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे बातचीत की। इसमें प्रमुख रूप से शहर में फैल रहे डेंगू और शहर की स्वच्छता, साफ सफाई मुद्दा अहम रहा। वार्ड नंबर 11 में साफ सफाई, रोड पर जो पानी बह रहा है उस पर तत्काल रोक लगाने हेतु और अनेक मांगों को लेकर को लेकर ज्ञापन प्रेषित करते हुए उचित कार्यवाही की मांग की है, सचिन दीक्षित ने बताया मुख्य रूप से वार्ड 11 और मथुरा वाला नई बस्ती में फैली हुई अन्यmiताओं, सुधार करवाते हुए और अपने वार्डों एवं क्षेत्र कॉलोनी के अंदर भी प्रतिदिन नगर निगम द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए गए सुपरवाइजर के माध्यम से प्रतिदिन नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जाए,
सचिन दीक्षित ने बताया डेंगू जैसे वायरस को देखते हुए नियमित फकिंग और कई जगह पानी की निकासी वाले पाइप डालने की मांग की तथा महामारी को लेकर भी आशंका व्यक्त करते हुए पूर्व से ही तैयारी करवाने की भी मांग की गई, मुख्य नगर आयुक्त जी की अनुपस्थिति में उपनगर आयुक्त द्वारा ज्ञापन लेकर उचित कार्रवाई का भरोसा भाजपा समर्थक मध्य प्रदेश कार्यकारिणी को दिया गया.. ज्ञापन प्रेषित करने वालों में उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष सचिन दीक्षित वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सोनू बालाजी, प्रदेश उपाध्यक्ष रोहित कुमार, जिला अध्यक्ष अधिवक्ता प्रकोष्ठ एडवोकेट मनीषा चौधरी जी, और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
रिखणीखाल-गणेशी देवी का जन्म 20 नवम्बर, 1925 को जनपद गढ़वाल के रिखणीखाल के गाँव नावेतल्ली में स्वर्गीय ठाकुर शेर सिंह रावत मालगुजार के घर में कोईराला रावत परिवार में हुआ। वे पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। सभी भाई-बहन ने अपने जीवन के 90 से 101 वर्ष पूरे किये।अब वे इस दुनिया में नहीं रहे।गणेशी देवी का गाँव रिखणीखाल के ही ग्राम ढुंगियाचौड है।उनकी इस अवस्था में खूब अच्छी तरह देखभाल हो रही है।वैसे भी वे निरोग महिला हैं।
गणेशी देवी की शिक्षा दीक्षा नहीं हुई। उस जमाने में स्कूल दूर होते थे तथा लड़कियों को पढ़ाने का रिवाज नहीं था।इनके पिता ठाकुर शेर सिंह रावत मालगुजार हुआ करते थे।वे मधुर स्वभाव तथा धीमी आवाज वाली महिला है।आज वे अपने नाती पोतों के साथ खुशी जीवन बिता रही हैं। इनके पिता का सन 1949 में निधन हो गया था।इनकी माता का नाम गमोदी देवी था।दादा का नाम मोती सिंह तथा दादी का नाम कुंवरी देवी था।
उत्तराखंड में अक्सर देखा जाता है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लोक संस्कृति की अनदेखी के कारण वहाँ के वाद्य यंत्र (ढोल, दमाऊ,मशकबीन, डौंर, हुड़का, रणसिन्घा आदि)के संवाहक कलाकारों की कमी होती जा रही है,जो कि पहले से पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही थी।इस कार्य को अपने पिता,दादा,परदादा से निपुणता हासिल करती रही।लेकिन अब देखा गया है कि सरकार की उदासीनता व रुचि न लेने के कारण नये कलाकार उभरकर नहीं आ रहे हैं तथा अब शर्मिन्दगी महसूस कर रहे हैं। ये सब सरकार से प्रोत्साहन व उचित मानदेय न मिलने से हो रहा है।अब जो बचे खुचे वाद्य यंत्र के कलाकार हैं वे भूखमरी की कगार पर पहुँच गये हैं। पहले समय मेें परदादा, दादा,पिता की विरासत संजोये रहते थे तथा पेशे को छोड़ते नहीं थे।लेकिन अब विलुप्त होता जा रहा है।
सरकार को इन वाद्य यंत्र कलाकारों को उचित मंच देकर इनका निरन्तर प्रोत्साहन देना चाहिए तभी ये कला जीवित रह पायेगी। ये लोग कई सालों से इस ढोल विद्या, जागर प्रथा को ढोते आ रहे हैं। अब इनको उचित मानदेय देकर इनका हौसलाअफजाई करना होगा तभी नये कलाकार उत्पन्न होंगें।
इसी कड़ी में जब रिखणीखाल प्रखंड के ग्राम द्वारी के ढोल व जागर सम्राट राजू जागैया का कहना है कि अब हमारे बच्चे रुचि नहीं ले रहे हैं, ये प्रथा तभी तक जीवित है जब तक हमारी पीढ़ी है,बाद में थाली बजाने वाला तक नसीब नहीं होगा।वे कहते हैं ये कामकाज हम कयी पीढियों से चलाते आ रहे हैं, अगर सरकार अभी भी नहीं जागी तो ये वाद्ययंत्र गुमनाम हो जायेगें।
सरकार को हमारी नयी पीढी को प्रोत्साहन देकर व उचित मानदेय देकर इस कार्य को आगे बढ़ाना होगा।राजू जागैया ढोल,डौंर, हुड़का में जागर लगाने के विशेषज्ञ हैं सिर्फ पिछडे हैं तो उचित मंचन न मिलने व प्रचार प्रसार न होने के कारण व सरकार की उपेक्षा होने से गुमनाम रहे हैं। उन्होने अपनी पीड़ा जताकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने को कहा है।
उत्तराखंड :मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। पीएमओ के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सुरंग में फंसे सभी श्रमिकों को सकुशल निकालने के प्रयास में जुटी है। सुरंग में फंसे लोगों के रेस्क्यू के लिए देश और दुनिया में ईजाद की गई आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। उम्मीद हैं कि जल्द इसमें सफलता मिल जायेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों के रेस्क्यू पर पल पल अपडेट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आज शासकीय आवास पर अधिकारियों के साथ श्रमिकों के बचाव के लिए चल रहे रेस्क्यू कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही बाधाओं से निपटने के लिए हर आवश्यक कदम उठाये जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी लगातार बचाव अभियान का अपडेट लिया जा रहा है। ऐसे में ग्राउंड जीरो पर जो भी रेस्क्यू कार्य किया जा रहा है, अधिकारी एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर समय पर अंजाम तक पहुंचाएं। रेस्क्यू कार्य के लिए जिन संसाधनों की जरूरत हैं, उनको तत्काल एजेंसियों को मुहैया करा कर तेजी से कार्य कराएं। सरकार की प्राथमिकता में श्रमिकों को सुरक्षित और समय पर बाहर निकालना है।
श्रमिकों और परिजनों के साथ सरकार खड़ी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुसीबत में फंसे श्रमिकों के परिजनों के साथ सरकार खड़ी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वह सभी परिजनों को रेस्क्यू की हर पल की जानकारी देते रहें। इसके अलावा सिलक्यारा पहुंचे परिजनों के लिए भी सहायता केंद्र खोलने और उनके रहने-खाने की जरूरत के हिसाब से मदद की जाए। उन्होंने कहा कि विपदा की इस घड़ी में परिजनों को धैर्य बनाये रखने की जरूरत है। सरकार हर वक्त उनके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग आपदा से निपटने के लिए देश और दुनिया में चले पुराने सुरंग रेस्क्यू के अनुभवों के आधार पर कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए अधिकारी पड़ोसी राज्य हिमचाल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत दुनिया के कई देशों में सुरंग निर्माण और आपदा के बाद हुए रेस्क्यू की तकनीकी को अपना रहे हैं। पीर पंजाल, अटल सुरंग, भंवर टोंक, सँगलदान जैसी बड़ी सुरंग निर्माण और लूज गिरने के बाद रेस्क्यू की जानकारी जुटाई जा रही है। इसी के अनुसार रेस्क्यू टीम श्रमिकों को बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, विशेष प्रमुख सचिव श्री अभिनव कुमार, सचिव मुख्यमंत्री श्री शैलेश बगौली, गढ़वाल कमिश्नर श्री विनय शंकर पांडेय, अपर पुलिस महानिदेशक ला एंड ऑर्डर श्री ए.पी.अंशुमन, सूचना महानिदेशक श्री बंशीधर तिवारी एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी उपस्थित थे।
केदारनाथ में प्रसाद बेच कर महिलाओं ने किया 35 लाख रुपए का व्यवसाय
श्री केदारनाथ धाम यात्रा इस बार जनपद की महिलाओं के लिए सौगात दे गई। जनपद में संचालित महिला समूहों के लिए यह यात्रा बेहद सुखद साबित हुई। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 60 हज़ार से ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदारनाथ धाम के दर्शनों को पहुचें जिसका सीधा प्रभाव महिलाओं की आय एवं आर्थिकी पर भी देखने को मिला।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते महिला समूहों के व्यवसाय को नई ऊंचाइयां मिली। केदारनाथ यात्रा से जुडे़ विभिन्न महिला समूहों ने इस वर्ष 70 लाख रुपए से ज्यादा का व्यापार किया। अकेले चोलाई के प्रसाद से लगभग 65 लाख रूपए का व्यवसाय हुआ। इसके अलावा स्थानीय हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि से पांच लाख रुपये की कमाई महिलाओं द्वारा की गई है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के उत्थान को किए जा रहे प्रयासों को भी इससे बल मिला है। इसी क्रम में महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सचिवालय परिसर में मिलेट बेकरी ऑउटलेट की भी शुरुआत की है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार का मंत्र अपना कर दूसरों को रोजगार देने की अपील से प्रभावित जिले की महिलाएं सीधे तौर पर केदारनाथ यात्रा में अपना योगदान दे रही हैं। जिसमें मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा महिलाओं को हर संभव मदद की जा रही है।
जनपद में महिलाएं बाबा केदारनाथ धाम के लिए स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद तैयार करने के साथ ही यात्रा मार्ग पर रेस्तरां, कैफे संचालित करने के साथ ही स्थानीय उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि बाबा केदारनाथ में दुनियाभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को चोलाई से निर्मित प्रसाद उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय शहद, हर्बल धूप समेत कई उत्पाद महिलाएं तैयार कर यात्रियों को उपलब्ध करवा रही हैं।
राज्य सरकार के निर्देशन में प्रशासन विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
श्री केदारनाथ धाम में जिले की महिलाओं द्वारा तैयार प्रसाद का विपणन करने वाले केदारनाथ प्रसादम सहकारी संघ के सचिव भाष्कर पुरोहित ने बताया कि उन्होंने विभिन्न हैलीपैड़ एवं मंदिर परिसर में तीर्थ यात्रियों को करीब 35 लाख रुपए का प्रसाद बेचा। बताया कि उनके पास जिले भर के करीब 20 महिला स्वयं सहायता समूहों की 400 से ज्यादा महिलाओं द्वारा तैयार चोलाई के लड्डू, हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि पहुंचता है। इसके अलावा गंगा जल के लिए पात्र एवं मंदिर की भस्म भी प्रसाद पैकेज का हिस्सा हैं। वहीं जनपद के काश्तकारो से 70 रूपए प्रतिकिलो के हिसाब से करीब 500 कुंतल चोलाई की खरीद की गई, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है।
रोजगार के साथ स्थानीय उत्पादों को भी मिला बढ़ावा
गंगा दुग्ध उत्पादन संघ की अध्यक्ष घुंघरा देवी ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने करीब 106 कुंतल चैलाई के लड्डू एवं चूरमा तैयार कर केदारनाथ में बेचा है। पिछले छह महीनों मेें उन्होंने 65 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया, जिसमें 30 महिलाएं एनआरएलएम के तहत गठित समूहों के माध्यम से उनसे नियमित तौर पर जुड़ी हैं। पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने करीब 25 लाख रुपए के लड्डू एवं चूरमा बेचा। समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपए मेहनताना देने के साथ ही समय-समय पर प्रशिक्षण भी देते हैं। बताया कि वर्ष 2017 में प्रसाद योजना शुरू होने से पहले चैलाई का उत्पादन बेहद सीमित हो गया था जबकि अब इसके उत्पादन में बढोतरी हुई है। बताया कि वे 60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से किसानों से चैलाई की खरीद करते हैं। इसके अलावा बेलपत्री का उत्पादन करने वाले किसानों को भी योजना का सीधा लाभ मिल रहा है। केवल बेलपत्री बेच कर महिलाओं ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये की कमाई की।
केदारनाथ में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या महिला समूहों के लिए बनी सौगात*
*विभिन्न महिला समूहों ने यात्रा के दौरान करीब 70 लाख रुपए से ज्यादा का किया कारोबार*
*अकेले चोलाई के प्रसाद से हुआ लगभग 65 लाख रूपए का व्यवसाय*
*500 से अधिक महिलाओं को मिला सीधा रोजगार*
श्री केदारनाथ धाम यात्रा इस बार जनपद की महिलाओं के लिए सौगात दे गई। जनपद में संचालित महिला समूहों के लिए यह यात्रा बेहद सुखद साबित हुई। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 60 हज़ार से ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदारनाथ धाम के दर्शनों को पहुचें जिसका सीधा प्रभाव महिलाओं की आय एवं आर्थिकी पर भी देखने को मिला। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते महिला समूहों के व्यवसाय को नई ऊंचाइयां मिली। केदारनाथ यात्रा से जुडे़ विभिन्न महिला समूहों ने इस वर्ष 70 लाख रुपए से ज्यादा का व्यापार किया। अकेले चोलाई के प्रसाद से लगभग 65 लाख रूपए का व्यवसाय हुआ। इसके अलावा स्थानीय हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि से पांच लाख रुपये की कमाई महिलाओं द्वारा की गई है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के उत्थान को किए जा रहे प्रयासों को भी इससे बल मिला है। इसी क्रम में महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सचिवालय परिसर में मिलेट बेकरी ऑउटलेट की भी शुरुआत की है।
यात्रा से मिला आत्मनिर्भरता को आधार*
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार का मंत्र अपना कर दूसरों को रोजगार देने की अपील से प्रभावित जिले की महिलाएं सीधे तौर पर केदारनाथ यात्रा में अपना योगदान दे रही हैं। जिसमें मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा महिलाओं को हर संभव मदद की जा रही है। जनपद में महिलाएं बाबा केदारनाथ धाम के लिए स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद तैयार करने के साथ ही यात्रा मार्ग पर रेस्तरां, कैफे संचालित करने के साथ ही स्थानीय उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि बाबा केदारनाथ में दुनियाभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को चोलाई से निर्मित प्रसाद उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय शहद, हर्बल धूप समेत कई उत्पाद महिलाएं तैयार कर यात्रियों को उपलब्ध करवा रही हैं। राज्य सरकार के निर्देशन में प्रशासन विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
*केदारनाथ में प्रसाद बेच कर महिलाओं ने किया 35 लाख रुपए का व्यवसाय*
श्री केदारनाथ धाम में जिले की महिलाओं द्वारा तैयार प्रसाद का विपणन करने वाले केदारनाथ प्रसादम सहकारी संघ के सचिव भाष्कर पुरोहित ने बताया कि उन्होंने विभिन्न हैलीपैड़ एवं मंदिर परिसर में तीर्थ यात्रियों को करीब 35 लाख रुपए का प्रसाद बेचा। बताया कि उनके पास जिले भर के करीब 20 महिला स्वयं सहायता समूहों की 400 से ज्यादा महिलाओं द्वारा तैयार चोलाई के लड्डू, हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि पहुंचता है। इसके अलावा गंगा जल के लिए पात्र एवं मंदिर की भस्म भी प्रसाद पैकेज का हिस्सा हैं। वहीं जनपद के काश्तकारो से 70 रूपए प्रतिकिलो के हिसाब से करीब 500 कुंतल चोलाई की खरीद की गई, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है।
*रोजगार के साथ स्थानीय उत्पादों को भी मिला बढ़ावा*
गंगा दुग्ध उत्पादन संघ की अध्यक्ष घुंघरा देवी ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने करीब 106 कुंतल चैलाई के लड्डू एवं चूरमा तैयार कर केदारनाथ में बेचा है। पिछले छह महीनों मेें उन्होंने 65 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया, जिसमें 30 महिलाएं एनआरएलएम के तहत गठित समूहों के माध्यम से उनसे नियमित तौर पर जुड़ी हैं। पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने करीब 25 लाख रुपए के लड्डू एवं चूरमा बेचा। समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपए मेहनताना देने के साथ ही समय-समय पर प्रशिक्षण भी देते हैं। बताया कि वर्ष 2017 में प्रसाद योजना शुरू होने से पहले चैलाई का उत्पादन बेहद सीमित हो गया था जबकि अब इसके उत्पादन में बढोतरी हुई है। बताया कि वे 60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से किसानों से चैलाई की खरीद करते हैं। इसके अलावा बेलपत्री का उत्पादन करने वाले किसानों को भी योजना का सीधा लाभ मिल रहा है। केवल बेलपत्री बेच कर महिलाओं ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये की कमाई की।
पौड़ी गढ़वाल के ग्राम पंचायत नावेतल्ली में जून 2008 में स्वर्गीय दिलवर सिंह गुसांई की स्मृति में भूमिदान देकर पंचायत भवन बनाया गया था,लेकिन तब से अभी तक मरम्मत के अभाव में दम तोड़ रहा है।इन पन्द्रह सालों में मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही होती रही।
आज की तिथि में भवन जीर्ण शीर्ण हालत में है।भवन के छत का लेंटर जगह-जगह से उखड़ गया है।खिड़की दरवाजे रंग रोगन के अभाव में सड़ गल गये हैं। भवन का फर्श भी उखड़ गया तथा जमीन दब गयी है।
छत भी झुक गयी है।रंग रोगन के नाम पर सफेदी की जगह काला काला ही नजर आता है।छत पर कयी जगह चगते हैं। कभी भी छत गिर सकती है।कयी बार हुक्मरानों को अवगत कराया गया लेकिन निराशा ही हुई।
अब क्या पता इस खबर के जाने से जिला प्रशासन के ऑख कान खुल जाये।सरकार दावे तो बहुत करती है लेकिन असली हकीकत यही है जो कैमरे के सामने है।